एकादशी व्रत कथा

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2020/07/21

सावन सोमवार व्रत कथा | सावन में कैसे करें भगवन भोलेनाथ की उपासना ?

  पं. शम्भू झा       2020/07/21
Sawan somwar katha in hindi


सावन सोमवार व्रत कथा:  भोलेनाथ का प्रिय महीना सावन का महीना प्रारंभ हो चुका है और आज हम आपके लिए सावन के महीने से शुरू किए जाने वाले सोलह सोमवार के व्रत की कथा लेकर आए है|

सोमवार व्रत का महत्व 


सोमवार का व्रत चैत्र, वैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष तथा कर्तिक मास में आरम्भ किया जाता है। श्रावण मास में सोमवार का व्रत करने का अधिक महत्व हैभविष्य पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल अष्टमी को सोमवार और आर्द्रा नक्षत्र हो, तो उस दिन से सोमवार का व्रत आरम्भ करना अति शुभकारी होता है। ग्रहण में हवन, पूजा, अर्चना व दान करने से जो पुण्य फल प्राप्त होता है,  वैसा हीं फल सोमवार का व्रत करने वाले को भी प्राप्त होता है।


चैत्र मास में सोमवार का व्रत करने से गंग-स्नान के समान, वैशाख मास में कन्यादान के समान, ज्येष्ठ मास में पुष्कर में स्नान करने के समान, आषाढ़ मास में यज्ञफल के समान, श्रावण में अश्वमेघ यज्ञ के समान, भाद्रपद मास में गोदान के समान, आश्विन माश में सुर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र के सरोवर में स्नान करने के समान तथा कर्तिक में ज्ञानी ब्रह्मणों को दान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष मे व्रत करने से स्त्री-पुरुषों को चंद्र-ग्रहण के समय काशी में गंगा-स्नान करने के समान, माघ मास में व्रत करने से दूध व गन्ने के रस से स्नान करके ब्रह्मा जी की पूजा करने के समान तथा फल्गुन मास में गोदान के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। सोमवार का व्रत साधारणतया दिन के तीसरे पहर तक होता है। यानि शाम तक रखा जाता है।


सोमवार व्रत के प्रकार

सोमवार व्रत तीन प्रकार का होता हैप्रति सोमवार व्रत, सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार का व्रत। इन सभी व्रतों के लिए एक ही विधि होती है। सोमवार व्रत, सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार तीनों की कथा अलग-अलग है।


नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में व्यक्ति को प्रातः स्नान कर शिव जी को जल चढ़ाना चाहिए तथा शिव -गौरी की पूजा करनी चाहिए। शिव पूजन के बाद सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए। इसके बाद केवल एक समय ही भोजन करना चाहिए अथवा फलाहार या फलों के रस का सेवन भी कर सकते हैं।


अग्नि पुराण के अनुसार चित्रा नक्षत्र युक्त सोमवार से लगातार सात व्रत करने पर व्यक्ति को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सोलह सोमवार का व्रत करने से मनवांछित वर प्राप्त होता है। सोलह सोमवार व्रत अविवाहित कन्याओं क़े लिए बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है। सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें मनोवांछित फल अवश्य मिलता है।

सोमवार व्रत पूजन सामग्री


  • शिव जी की मूर्ति
  • भांग
  • बेलपत्र
  • जल
  • धूप
  • दीप
  • गंगाजल
  • धतूरा
  • इत्र
  • सफेद चंदन
  • रोली
  • अष्टगंध
  • सफेद वस्त्र

सोमवार व्रत शिव पूजन विधि 


सोमवार के दिन प्रात:काल उठकर नित्य-क्रम कर स्नान कर लें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा गृह को स्वच्छ कर शुद्ध कर लें। सभी सामग्री एकत्रित कर लें। शिव भगवान की प्रतिमा के सामने आसन पर बैठ जायें।

 संकल्प


किसी भी पूजा या व्रत को आरम्भ करने के लिये सर्व प्रथम संकल्प करना चाहिये। व्रत के पहले दिन संकल्प किया जाता है। उसके बाद आप नियमित पूजा और व्रत करें। सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर निम्न मंत्र के साथ संकल्प करें:‌ -


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्री मद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌ उत्तमे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरान्वितायाम्‌ अमुकनक्षत्रे अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकामुकराशिस्थितेषु चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुक नाम अहं अमुक कार्यसिद्धियार्थ सोमवार व्रत प्रारम्भ करिष्ये ।

इसके बाद सभी वस्तुएँ श्री शिव भगवान के पास छोड़ दें। और दोनों हाथ जोड़कर शिव भगवान का ध्यान करें।

आवाहन:- अब हाथ में अक्षत तथा फूल लेकर दोनों हाथ जोड़ लें और भगवान शिव का आवाहन करें ।


ऊँ शिवशंकरमीशानं द्वादशार्द्धं त्रिलोचनम्।

उमासहितं देवं शिवं आवाहयाम्यहम्॥



हाथ में लिये हुए फूल और अक्षत शिव भगवान को समर्पित करें। उसके बाद -
  • सबसे पहले भगवान शिव पर जल समर्पित करें।
  • जल के बाद सफेद वस्त्र समर्पित करें।
  • सफेद चंदन से भगवान को तिलक लगायें एवं तिलक पर अक्षत लगायें।
  • सफेद पुष्प,धतुरा,बेल-पत्र,भांग एवं पुष्पमाला अर्पित करें।
  • अष्टगंध, धूप अर्पित कर, दीप दिखायें।
  • भगवान को भोग के रूप में ऋतु फल या बेल और मिष्ठान अर्पित करें।

इसके बाद सोमवार व्रत कथा को पढ़े अथवा सुने। ध्यान रखें कम-से-कम एक व्यक्ति इस कथा  को अवश्य सुने। कथा सुनने वाला भी शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल के पास बैठे। तत्पश्चात शिव जी की आरती करें । उपस्थित जनों को आरती दें और स्वयं भी आरती लें। प्रसाद सभी उपस्थित जनों में वितरित करें। स्वयं के लिये थोड़ा रख लें। व्रत खोलते समय सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करें। उसके बाद भोजन करें।

सावन सोमवार व्रत कथा 


एक समय की बात है अमरपुर नगर में एक अमीर साहूकार रहता था उसके कोई संतान नहीं थी जिस कारण वह बहोत दुखी रहता था| संतान प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार व्रत कर शिवजी की पूजा करता था | संध्या के समय मंदिर में जाकर भगवान शिव के आगे घी का दीपक जलाता था | उसकी भक्ति देख मां पार्वती प्रसन्न हुई और उन्होंने भगवान शिव से कहा,  "हे प्राणनाथ ! यह आपका सच्चा भक्त है कृपा कर इस इच्छा पूरी करें|



तब भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि पूर्व जन्म के कर्मों के कारण साहूकार के भाग्य में संतान नहीं है लेकिन माता पार्वती नहीं मानी, तब भगवान शिव ने उस साहूकार को दर्शन दिए और संतान प्राप्ति के वरदान के साथ यह भी बताया कि उसका पुत्र अल्पायु होगा और उसकी आयु मात्र 16 वर्ष की होगी यह सुनकर वह साहू  प्रसन्न तो हुआ लेकिन चिंतित भी हुआ |



उसने यह सारी बात अपनी पत्नी को भी बताई पुत्र के अल्प आयु होने की बात जानकर साहू की पत्नी  भी बहुत दुखी हुई, लेकिन साहूकार ने अपने सोमवार के व्रत का नियम नहीं छोड़ा कुछ समय बाद  साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम अमर रखा गया | जब अमर 11 साल का हुआ तो साहूकार ने उसे अपने मामा दीपचंद के साथ शिक्षा ग्रहण करने काशी भेज दिया | साहूकार ने उन्हें रास्ते के लिए कुछ धन दिया और कहा जहां भी तुम रात्रि विश्राम के लिए रहोगे वही यज्ञ तथा ब्राह्मणों को भोजन करवाना |



यात्रा करते हुए अमर और दीपचंद एक राज्य में पहुंचे जहां की राजकुमारी का विवाह था परंतु जिस राजकुमार से उसका विवाह हो रहा था वह कान्हा था यह बात किसी को पता ना चले इसलिए उस राजकुमार के पिता ने अमर से दूल्हे की जगह बैठने की विनती करी, और अमर ने विनती स्वीकार करते हुए राजकुमारी चंद्रिका से विवाह कर लीया, लेकिन जब विदाई होने लगी तब अमर ने राजकुमारी चंद्रिका को सारी बात बता दी |



और उन्हें अपने पिता के घर छोड़कर काशी चला गया जब अमर 16 वर्ष का हुआ तब उन्होंने एक यज्ञ का आयोजन किया और यज्ञ की समाप्ति पर ब्राह्मण को भोजन कराया और अन्न और वस्त्र दान किए | उसी रात में अमर की मृत्यु हो गई, अब अमर के मामा दीपचंद जोर-जोर से विलाप करने लगे | उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे विलाप की आवाज सुनकर माता पार्वती ने शिवजी से कहा कि वह उस रोते हुए व्यक्ति का कष्ट दूर कर दें |



तब भगवान शिव ने कहा, "यह वही साहूकार का बालक है जिसे उन्होंने 16 वर्ष तक जीवित रहने का वरदान दिया था तब माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा हे प्राणनाथ इसका पिता 16 वर्षीय सोमवार का व्रत करते हुए आपको भोग लगाता है कृपा कर इस के दुखों को दूर करें | तब माता पार्वती की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने अमर को जीवन का वरदान दिया वरदान प्राप्त होते ही अमर जीवित हो उठा | उसने अपनी शिक्षा पूरी कर अपने नगर की ओर वापस चल दिया | रास्ते में वह नगर आया जहां अमर का विवाह हुआ था |



वहां की राजा राजकुमारी चंद्रिका ने उन्हें पहचान लिया तब राजा ने राजकुमारी चंद्रिका को अमर के साथ प्रसन्नता पूर्वक विदा किया | वहीं दूसरी ओर  साहूकार ये जानते थे कि 16 वर्ष की आयु में उनके पुत्र की मृत्यु निश्चित थी, इस कारण वह बड़े दुखी थे और कष्ट में अपना जीवन बिता रहे थे |तभी उनका पुत्र अमर राजकुमारी चंद्रिका के साथ घर पहुंचा अमर को अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ देख कर साहूकार और उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुए |



उसी रात भगवान शिव ने साहूकार के सपने में आकर कहा, "हे श्रेष्ठी मैंने तुम्हारे सोमवार व्रत से प्रसन्न होकर तुम्हारे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है |"


दोस्तों इस प्रकार भाग्य में नहीं लिखे होने के बाद भी सोमवार के व्रत के प्रभाव से साहूकार को पुत्र सुख की प्राप्ति हुई |भोलेनाथ जैसा सुख साहूकार को दिया वैसा ही इस सावन सोमवार की कथा  को कहते सुनते और हूंकार भरनेवाले  सबको देना |

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कथा हो जाने के बाद भगवान् भोलेनाथ की आरती करें तत्पश्चात क्षमा प्रार्थना स्तोत्र आदि का पाठ करें | और आपको यह लेख कैसा लगा अपना प्रतिक्रिया हमें कमेंट के माध्यम से जरूर दें |

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