एकादशी व्रत कथा

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2020/07/15

Putrada Ekadashi Vrat Katha | संतान की इच्छा रखने वाले यह व्रत जरूर करें

  पं. शम्भू झा       2020/07/15
Putrada Ekadashi Vrat Katha, Putrada Ekadashi


Putrada Ekadashi Vrat Katha: भविष्योत्तर पुराणमें भगवान्‌ श्रीकृष्ण तथा महाराज युधिष्ठिर के संवाद में "पुत्रदा एकादशी" के महात्म्य का वर्णन मिलता है ।

महाराज युधिष्टिर ने पुछा, 'हे श्रीकृष्ण ! कृपा करके मुझे पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का वर्णन करे । उस व्रत की विधि क्‍या है ? तथा कौन से देवताकी पूजा की जाती है ?'

भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने कहा, "जगत कल्याण के लिए इस एकादशी का मैं वर्णन करूँगा । अन्य एकादशी की तरह ही इस एकादशी को व्रत करे । इसे पुत्रदा एकादशी ( putrada ekadashi ) कहते है । सब पापों का हरण करनेवाली यह सर्वोत्तम तिथि है । 

कामना तथा सिद्धी को पूर्ण करनेवाले भगवान्‌ इस तिथिके अधिदेवता है । पूरे त्रिलोकमें यह सबसे उत्तम तिथि है ।'

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

एक दिन घोड़े पर सवार होकर महाराज सुकेतुमान गहरे वन में चले गये । पुरोहित और दूसरे लोगों को इसकी कल्पना भी नही थी । पशु-पक्षियों से भरे हुए इस गहरे वन में महाराज भ्रमण कर रहे थे । दोपहर होते ही, महाराज को भूख और प्यास लगी ।

जल की तलाश में महाराज इधर-उधर घूम रहे थे । पूर्वजन्म के पुण्य से  उन्हे एक जलाशय दिखाई दिया। उस जलाशय के पास ही एक मुनि का आश्रम था ! अनेक शुभ शकुन होने लगे, उनकी बाँयी आँख और बायाँ हाथ फडकने लगा । 

शुभ घटना की आशा में राजा आश्रम में गये । घोडे से उरकर राजा ने  सभी मुनियों को प्रणाम किया, तब उन मुनियों ने कहा,  "हे राजन ! हम आप पर प्रसन्न है ।"

राजा ने कहा, "हे  मुनिगण ! आप कौन है ? आपके नाम क्या है? आप यहाँपर किस उद्देश्यसे एकत्रित हुए है ? कृपया हमें  सत्य बताईये।"


मुनि ने कहा, "राजन ! हम विश्वदेव है । आजसे आनेवाली पाँचवी तिथिसे माघ मास प्रारंभ होगा । आज 'पुत्रदा एकादशी' है । जो कोई भी यह एकादशी करता है उसे पुत्रप्राप्ति अवश्य होती है ।"

राजा ने कहा, "विश्वदेवगण ! अगर आप मुझपर प्रसन्न है तो मुझे कृपया पुत्र प्राप्ति हो !"

मुनि ने कहा, "राजन ! आज पुत्रदा एकादशी है । आज आप इसका पालन करे, भगवान केशव के प्रसाद रूप आपको पुत्र की प्राप्ति होगी।"

भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने कहा, "हे युधिष्ठिर ! इस प्रकार मुनियों के कहनेपर राजा ने एकादशी व्रत किया और द्वादशी को व्रत संपूर्ण करके (पारण करके ) मुनियों का आशिरवाद लेकर राजा वापस आया ।"

उसके पश्चात्‌ राणी गर्भवती हुई और एकादशी के पुण्य से राजा को तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई । जिसने अपने उत्तम गुणों से अपने पिता को संतोष दिया, वह उत्तम प्रजा पालक था ।

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इसलिए, 'हे राजन ! पुत्रदा' व्रत एवं पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। जो कोई भी इस व्रत का पालन करता है उसे पुत्रकी प्राप्ति होकर वह मनुष्य स्वर्गप्राप्त करता है ।'

“जो इस putrada ekadashi vrat katha की महिमा पढेगा, सुनेगा या कहेगा उसे अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति होगी ।"
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