एकादशी व्रत कथा

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2020/07/19

Apara Ekadashi:क्या है अपरा एकादशी व्रत के महत्व और क्यों करना चाहिए ये व्रत ?

  पं. शम्भू झा       2020/07/19

Apara Ekadashi

Apara Ekadashi: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आनेवाली "अपरा एकादशी" का वर्णन ब्रह्मांड पुराण में महाराज युधिष्ठिर और भगवान्‌ श्रीकृष्ण के संवाद मे आता है ।

युधिष्ठिर महाराज ने भगवान्‌ श्रीकृष्ण को पूछा, "हे कृष्ण ! हे जनार्दन! ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में आनेवाली एकादशी का नाम क्या है ? उसके महात्म्य के बारे में कृपया आप वर्णन करें।"

भगवान्‌ श्रीकृष्ण युधिष्ठिर महाराज को कहने लगे, "हे महाराज युधिष्ठिर! अपने सचमुच बहुत ही समझदारी का और वास्तविकता से देखा जाए तो सबके लिए हितकारक प्रश्न पूछा है । 

इस एकादशी का नाम "अपरा" है। जो भी इस व्रत पालन करता है वह समस्त पापों से मुक्त होकर अमर्यादित पुण्य संचय करता है । इस व्रत के पालन से अनेक घोर पापों से, जैसे कि- 

  • ब्रह्महत्या 
  • भ्रुणहत्या 
  • दूसरों की निंदा करना
  • अनैतिक स्त्री-पुरुष संग
  • झूठ बोलना, 
  • झूठी गवाही देना, 
  • अभिमान करना, 
  • पैसे के लिए अध्यापन तथा वेद पाठण,
  • अपनी मर्जी से ग्रंथ लिखना, 
  • साथ ही झूठे भविष्य कहनेवाले, 
  • फँसाने वाले वैद्य 

से मुक्त होते है। लडाई से डरकर भागकर आए हुए क्षत्रिय को नरकद्वार मिलता है, क्योंकि उन्होंने अपने धर्म का पालन न करके अपने पतन के लिए जिम्मेदार वह होते है। परंतु इस व्रत के पालन से ऐसे क्षत्रिय को भी स्वर्ग प्राप्ति होती है।"

भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने आगे कहा, "हे राजन्‌ ! अपने गुरु से ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात उनकी निंदा करने वाले शिष्य को पाप की राशियाँ मिलती है। उस निंदित व्यक्ति ने भी इस व्रत का पालन किया तो वह भी सभी पापों से मुक्त हो जाता है।

हे राजाधिराज ! कार्तिक मास में पुष्कर तीर्थ में स्नान करने से प्राप्त किया हुआ पुण्य, माघ मास में प्रयाग तीर्थ में स्नान करने से, काशी में जाकर महाशिवरात्री पालन करने से, गया में जाकर विष्णुपाद पर पिंडदान करने से,

गुरु जब भी सिंह राशी में आता है, उस समय गौतमी में स्नान करने से, कुंभ मेले के समय केदारनाथ जाने से, बद्रिनाथ यात्रा करने से, सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्री ब्रह्मसरोवर में स्नान करने से तथा हाथी, अश्व, सुवर्ण और भूमिदान से प्राप्त किया हुआ फल केवल अपरा एकादशी ( Apara Ekadashi ) के पालन से सहज प्राप्त होता है। 

यह व्रत बहुत ही तीक्ष्ण कुल्हाडी से पापवृक्ष को तोड देता है अथवा आगके जैसे सारे पाप वृक्षों को जलाकर भस्म करता है। यह व्रत तेजस्वी सूर्य से पापों के अंध:कार को दूर भगाता है, हिरन रूपी पापों को भगाने वाला यह सिंह व्रत है।

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इस अपरा एकादशी ( Apara Ekadashi ) का पालन करनेसे और भगवान्‌ के त्रिविक्रम रूप की पूजा करनेसे वैकुंठ की प्राप्ति होती है। दूसरों के हित के लिए जो कोई भी यह apara ekadashi vrat katha महात्म्य पढेगा अथवा जो सुनेगा वह सभी पापोंसे मुक्त हो जाता है।
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